हैलो दोस्तो मै (ग्रूप सेक्स स्टोरीज) मै आप
दोस्तो,आप सभी को एक बार फिर से प्यार भरा नमस्ते.🙏 🙏🙏🙏🙏🙏🙏
मेरी हॉट भाभियों और सेक्सी लड़कियों को मे एक बार फिर से नई कहानी देवर भाभी की चुदाई की के साथ हाजिर हुआ
यह कहानी मेरे चचेरे भाई की जवान रसभरी बीवी की चुदाई भाग - 2
भाभी की चूत की कहानी में पढ़ें कि भाई की बीवी को एक बार चोद लेने के बाद उसके जिस्म का नशा मेरे लंड के ऊपर चढ़ गया. मैंने उसकी चुत को कैसे कैसे चुदाई तृप्त की?
नमस्कार दोस्तो, मेरी भाभी की चूत की कहानी के पहले भाग मे आपने पढ़ा
चचेरे भाई की मस्त जवान पत्नी का आकर्षण
में आपने पढ़ा कि वर्षों के इंतजार के बाद आखिरकार सुनीता मुझसे मिलने के लिए तैयार हुई. मैंने उसकी चुत में लंड प्रवेश कराया और हमने चुदाई का आनंद लिया.
कुछ समय तक वो मेरे ऊपर लेटी ही रही जब तक कि मेरा लंड उसकी चुत से बाहर नहीं आ गया। हम दोनों के साथ हमारे दोनों महारथी भी घमासान युद्ध करके थक चुके थे।
मैंने सुनीता के होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसना शुरू कर दिया। 10 मिनट के बाद वो बेड से उठी और कपड़े से अपनी चुत और मेरी जाँघें साफ कीं.
इस समय वो पूर्ण नंगी बदन में थी. उसके इस मादक रूप को देखने के लिए में इतने वर्ष तरसा था। उसके शरीर का एक-एक कटाव लाजवाब था।
“अब तो चाय पीओगे या कुछ और?” उसने तंज कसते हुए पूछा.
“फ़िलहाल चाय ले आओ और भी बहुत कुछ पीना है.” मैंने उसके चूचे को दाँतों से काटते हुए बोला।
इसके बाद जरूर पढे चचेरे भाई की बीवी चुदाई भाग-1
अब आगे की भाभी की चूत की कहानी:👇
वो किचन की ओर मुड़ी. हे वहाआ … क्या नज़ारा था … उसके दोनों माँसल कुल्लो का आपस में घर्षण देखकर बेजान से पड़े लंड में फिर करण्ट सा दौड़ गया।
उसका गदराया हुआ जिस्म बिना कपड़ों के कहर बरपा रहा था. साक्षात रतिदेवी के रूप में थी सुनीता!
मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ और मैं फिर किचन में चला गया और उसको पीछे से दबोच लिया.
मेरा लंड उसके माँसल कुल्लो की दरारों के बीच में फंस कर कसमसा रहा था।
“चाय तो बना लेने दो?”. उसने मुझे रोकने की कोशिश की.
मैंने कुछ नहीं सुना और घुटनों के बल बैठ गया और उसके कुल्लो को चूमने लगा और एक हाथ से उसकी चूत को सहलाने लगा।
उसकी चुत फिर से गीली हो गयी थी.
अपनी दो उंगलियां चुत के अंदर डाल कर मैं घुमाने लगा.
जैसे ही उंगलियां चुत की दीवारों से टकरातीं सुनीता चिहुंक उठती। फिर से चाय और सुनीता का जिस्म, दोनों उफान पर थे।
फिर मैंने अपने होंठों को उसकी चुत की पंखुड़ियों के ऊपर रखा. उसने मेरा सिर कस कर पकड़ लिया और चुत के अंदर दबाने लगी. मैंने धीरे-धीरे उसकी चुत को अपनी जीभ से चाटना शुरू किया.
उसकी चुत ने रस छोड़ना शुरू कर दिया. मैंने एक उंगली चुत में गीली करके उसके गांड में धीरे से घुसा दी. अब सुनीता के लिए एक साथ चुत चटाई और गांड चटाई सहन करना मुश्किल हो रहा था।
फिर मैंने उसकी गांड में दो उंगलियां घुसा दीं. उसकी हल्की सी चीख़ निकल गयी. वो चाय छानने लगी और मैं उसकी गांड चाटकर उसको आनंद देता रहा. उसके गोल-गोल माँसल कुल्लो लंड को गांड में प्रवेश की चुनौती दे रहे थे।
उसने गाउन पहन कर अपनी बेटी को चाय-बिस्कुट और कुछ चॉकलेट देकर फिर से दरवाजा बाहर से बन्द कर दिया।
बेडरूम में आकर उसने गाउन उतार दिया. हम दोनों ने चुदाई में चाय नाश्ता किया और उसने एक हसरत भरी नजरों से मेरे मुरझाये हुए लंड को देखा।
चाय नाश्ता करने के बाद वो आकर मेरे पास लेट गयी और हम दोनों पुरानी बातें करने लगे.
इस दौरान उसके हाथ मेरे लंड को सहलाते रहे।
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मैंने उसको उल्टा लिटा कर उसकी पीठ, क़मर और कुल्लो को सहलाते हुए होंठों से बहुत प्यार किया।
वो पलट गई और अपने चूचो को मेरे मुँह में दे दिया. मैंने उसके चूचो से दूध निकालने का बहुत प्रयास किया और दोनों हाथों से उसके चुचो को मर्दन किया.
धीरे से उसके पेट को चूमते हुए उसकी चुत पर होंठ रख दिये. शायद उसको भी मेरा चुत चूसना बहुत पसंद आ रहा था. मैंने उसकी चुत की दोनों दीवारों को थोड़ा सा खोला अंदर की ओर, चुत गुलाबी रंग की होती जा रही थी।
हल्के काले बाल उसकी चुत को और कामुक बना रहे थे.
मैंने दो उंगलियां उसकी चुत में डाल कर घर्षण शुरू किया और होंठों से उसकी चूत को चाटना जारी रखा।
सुनीता के लिए अब खुद को संभालना मुश्किल हो गया था. वो अपने कुल्लो को उछालने लगी थी।
उसने ना जाने कितनी बार चुत का पानी छोड़ा और मैं सारा चुतरस पीता गया.
वो बुरी तरह से हांफने लगी थी.
उसने मेरे लंड को पकड़ कर हिलाने शुरू कर दिया. वो अब लंड को चुत में समा लेना चाहती थी।
“ये तैयार क्यों नहीं हो रहा है?” वो लंड को चुत पर रगड़ती हुई कामुक आवाज में बोली।
मैंने उसे मुखमैथुन करने को बोला. वो कुछ झिझकी मगर फिर तुरंत लंड को मुँह में ले लिया।
वो धीरे-धीरे मुझे मदहोश कर रही थी. मेरा लंड पूरा खडा हो चुका था. कभी दाँतों से काटती तो कभी पूरा लंड गले तक ले जाती. कभी अण्डकोषों को मुँह में भर कर चूसती और को जीभ से धीरे-धीरे सहलाती।
उसके लंड चटाई ने मुझे कामवासना के स्वर्ग में पहुंचा दिया. मुझे लगने लगा कि कहीं मेरा संयम इसके मुँह में ही न टूट जाये।
“अरे कहीं मेरा वीर्य तुम्हारे मुँह में ना निकल जाए.” मैंने उसको सचेत करते हुए कहा.
वो मेरे लंड को दांतों से काटते हुए बोली- मेरा तो सारा चुतरस जाने कितनी बार पी लिया और अपना एक बार भी नहीं पिलाओगे? मुझे तुम्हारे वीर्य का स्वाद लेना है।
फिर मैंने उसे ड़ी सी पोजीशन बदलने को कहा।
अब मेरा मुँह उसकी चुत पर था और उसके मुँह में मेरा लंड. वो कभी मुँह में ही पूरा लंड दबा लेती, मानो अंदर से वीर्य खीचना चाहती हो और इधर मेरी जीभ उसको कुल्ले उछालने पर विवश कर रही थी!
मेरे अण्डकोषों को धीरे-धीरे सहलाकर वो मुझे उसकी चुत को दाँतों से काटने पर मजबूर कर देती थी। मैं भी उसकी चुत के दोनों होंठों को अपने मुँह में भर कर चूसने लगा.
उसके मुँह में मेरा लंड होने की वज़ह से वो सीत्कार भी नहीं पा रही थी, मगर उसके कुल्ले सिकुड़ जाते थे।
“मैं झड़ने वाला हूँ!” मैंने उत्तेजना को संभालते हुए कहा.
तभी उसने मेरे लंड का अपने मुँह में और दबाव बढ़ा दिया, वो सच में सारा वीर्य निचोड़ लेना चाहती थी. लंड ने भी उसके मुँह में झटके मारना शुरू कर दिया और लंड ने सारा गर्म-गर्म लावा सुनीता के मुँह में छोड़ दिया.
सुनो ने मेरे वीर्य की एक-एक बूंद को लंड के अंदर से चूस लिया। उसकी भी मुझे प्यासा नहीं छोड़ रही थी. इस बार उसकी चुत ने ढे़र सारा गर्म चुतरस छोड़ दिया.
उसके कुल्ले अकड़ से गये, मानो सारा चुतरस बाहर फेंक देना चाहते हों. मैंने सारा योनिरस चाट-चाट कर साफ कर दिया. अब उसकी चुत
से अंदर तक गुलाबी दिख रही थी।
और मैं हांफने लगे।
मगर दोनों की आंखों में एक संतुष्टि थी, जैसे आज वर्षों की प्यास बुझ गयी हो।
मैंने समय देखा तो उसने कहा- अरे अभी तो बहुत समय है, अभी तो इसको एक और चटाई करनी है.
… और कहते हुए उसने मेरे लंड को मुँह में भर लिया।
एक लाजवाब लंड चुत के बाद हम दोनों ने काफी देर तक आराम किया।
फिर उसने पूछा- खाने में क्या खाओगे?
“जो तुम अच्छा बनाती हो वो बना लो.” मैंने भी प्यार से जवाब दे दिया.
उसने सारी तैयारी पहले से ही कर रखी थी। वो किचन का काम बिना कपड़ों के ही कर रही थी. उसको इस तरह बिना कपड़ों में काम करते देखना सच में शब्दों में वर्णित करना मुश्किल है।
आटा गूँथते समय उसके माँसल कुल्लो में जो कंपन हो रहा था वो मुझे फिर उसके पास खींच रहा था. उसके चुचे मानो आटा गूँथने में हाथों की मदद कर रहे हों।
जितनी ताकत से वो हाथ चलाती उतनी गति से उसके चुचे हिल रहे थे। उसकी शारीरिक गतिविधियों ने लंड में फिर से रक्तसंचार बढ़ा दिया।
मैंने किचन से नारियल तेल उठाया और उसके माँसल कुल्लो पर मलना शुरू कर दिया।
सुनीता को मेरे लक्ष्य का अनुमान नहीं था. मैंने धीरे-धीरे उसके गांड में नारियल के तेल से भीगी हुई उंगलियां घुसानी शुरू कर दीं।
नारियल की चिकनाहट उसे दर्द का अहसास नहीं होने दे रही थी और वो रोटियाँ बनाने में व्यस्त रही। मेरी उंगलियों ने नारियल के तेल के साथ उसके चुत का रास्ता थोड़ा सा सुगम कर दिया.
सुनीता इस अप्राकृतिक मैथुन का भरपूर आनंद ले रही थी।
फिर मैंने उसे थोड़ा सा झुकाया और गांड को ध्यान से देखा.
छेद थोड़ा सा चौड़ा हो गया था.
अब तक सुनीता आता गूँथ चुकी थी.
मैंने अपने तने हुए लंड को नारियल के तेल में डुबोकर लिंगमुण्ड उसकी गांड पर रखा।
वो शायद इस हमले से अंजान थी. मैंने थोड़ा सा झुक कर एक हल्का सा झटका मारा तो लंड छेद से फिसल गया.
मैंने थोड़ा सा कुल्लो को चौड़ा कर फिर छेद पर निशाना लगाया.
इस बार लंड उसके सँकरे गांड में आधे से ज्यादा घुस चुका था।
सुनीता के मुँह से चीख सी निकल गयी और वो सीधी खड़ी हो गयी. अपने गांड को सहलाने लगी।
“अरे डरो मत … वैसे भी रास्ता तो बन ही गया है, अब तो मजे ले लो.” मैंने उसको मनाते हुए कहा.
मगर वो नहीं मानी.
मैंने फिर उंगलियों से गांड चटाई जारी रखा.
नारियल का तेल उसकी गांड में अंदर तक भर गया था.
धीरे-धीरे सुनीता भी कुल्लो को सिकोड़ने लगी. उसे असीम आनंद की अनुभूति होने लगी थी।
इसी समय मैंने उसे रसोई की स्लैब पर पूरा झुकाया और चिकने लंड को गांड में धीरे से घुसाना शुरू कर दिया.
इस बार सुनीता लंड लेने को तैयार थी.
जैसे-जैसे लंड अंदर जा रहा था, लंड को उतनी ही मेहनत करनी पड़ रही थी. आगे मार्ग बहुत संकीर्ण था।
अथक प्रयास और गाड के सहयोग से पूरा l उसकी गांड में समा गया.
उसके मुँह से एक आह … निकली। मैंने धीरे-धीरे लंड
आगे-पीछे करना शुरू किया.
लंड खींचते समय उसकी गांड की अंदरूनी त्वचा भी लंड के साथ खिंचती हुई सी प्रतीत होती थी.
उसकी मगांड कुछ सुगम हो गया था। अब मैंने उसके कुल्लो को पकड़कर तेज-तेज धक्के लगाने शुरू कर दिये.
मेरे हर धक्के पर वो आह-आह … करने लगी. उसके चुचे भी धक्कों के साथ उछल पड़ते थे।
“और तेज … और अदंर डालो … फाड़ दो आज … आह्ह … और तेज … और तेज!” कहते हुए वो धीरे-धीरे बड़बड़ाने लगी,
10 मिनट के भरपूर गांड चुदाई का सुनीता ने सम्पूर्ण आनन्द लिया.
स्खलन से पूर्व मैंने पूछा- अन्दर छोड़ दूँ या मुँह में लोगी?
उसने तुरंत पलट कर पूरा लंड मुँह में ले लिया. मानो किसी बच्चे को लॉलीपॉप मिल गया हो. वो सब कुछ भूल कर लडं को चूसने लगी.
कभी मेरे अण्डकोषों को सहलाती और कभी लिंग को हाथ में लेकर मसल देती. फिर एक झटके में सारा गर्म लावा उसके मुँह में छूट गया। उसने वीर्य की एक-एक बूंद पी ली और मैं लगभग निढाल सा हो गया।
मैं जितनी बार उसके माँसल कुल्ले देखता, पता नहीं कहाँ से लंड में जान आ जाती. आज सुकून था कि उसके कु का भी भोज कर लिया था।
फिर उसने खाना बना लिया.
वह अपनी बेटी को खाना देने गयी तो वो गहरी नींद में सो रही थी. सुनीता ने उसके कमरे का दरवाजा फिर से बंद कर दिया.
हम दोनों ने फिर नगे में ही भोजन किया. शायद आज हम दोनों ने कपड़े न पहनने की कसम खा रखी थी।
खाना खाने के बाद हल्की सी नींद आ गयी. फिर अचानक आँख खुल गयी तो देखा कि सुनीता मुँह में लंड लिए चूस रही थी.
शायद उसकी चुत अभी भी प्यासी थी.
थोड़ी ही देर में उसने मेरे लंड में फिर रक्तसंचार भर दिया और वो पुनः चढ़ाई के लिए तैयार हो गया।
मैंने सुनीता को सीधा पीठ के बल लिटाया. उसकी दोनों टांगों को घुटनों से मोड़कर थोड़ा सा चौड़ा कर दिया और उसकी चुत को होंठों से चूसना शुरू कर दिया.
जीभ को उसके गांड से चुतड तक फिराना शुरू कर दिया और जैसे ही जीभ चुत के अंदर जाती, वो कांप उठती.
सुनीता फिर से गर्म होकर कुल्लो और को उछालने लगी। इस बार मैंने उसके चुत पर लंड रख कर एक जोरदार झटका मारा. पूरा लंड एक बार में ही अंदरूनी दीवारों से जाकर टकरा गया.
इस जोरदार आक्रमण से सुनीता चीख पड़ी और मुझे कसकर दबोच लिया।
मैंने उसके खड़े हो चुके चूचकों को चूसना शुरू कर दिया. अब लंड को उसकी उम्मीद से ज्यादा धीमे-धीमे आगे-पीछे करना शुरू कर दिया.
वो मेरे कुल्लो को दबा कर गांड को और गहराई में ले जाने लगी।
जैसे जैसे घर्षण बढ़ रहा था, उसके कुल्ले में भी उछाल आना शुरू हो गया. मैं बीच में धक्के बन्द कर देता तो वो कुल्ले को उठा देती।
उस दिन उसे स्लो मोशन में मैथुन कर मैंने बहुत तड़पाया. फिर उसको घोड़ी बनने को बोला तो वो तुरंत बन गयी।
बाप रे … घोड़ी बनते ही उसके माँसल कुल्ले और बड़े लगने लगे. मैंने लंड उसके चुत पर लगाया और तेज गति से प्रहार शुरू कर दिया. सुनीता भी यही चाहती थी.
मेरे हर झटके से उसके स्तन झूले की तरह हिल जाते और एक दो बार मैंने लड उसके गांड में भी डाल दिया. मगर वो चुत की संतुष्टि चाहती थी। मेरे हर धक्के पर वो आह-आह और कामुक सीत्कार निकाल रही थी।
उसे चुत के अंतिम पड़ाव पर लंड का टकराना मदहोश कर रहा था. उसके माँसल कुल्लो के बीच से लंड एकदम अंदर-बाहर जाना मुझे रोम मकर रहा था। जिन कुल्लो की कल्पना में मैंने कितनी बार वीर्य बहाया था, आज उन दोनों माँसल कुल्लो के ऊपर मेरा अधिकार था.
इतने में ही सुनीता ने चूतरस
छोड़ दिया और मुझे रुकने को कहा. मैंने उसके चुत से रस से सना हुआ लंड बाहर निकाला। लंड बाहर निकलते ही सुनीता ने मुँह में लेकर साफ कर दि
अब मेरी बारी थी. मैंने उसकी दोनों टाँगें चौड़ी करके उसकी चुत का सारा चुतरस साफ कर दिया. मेरे खड़े लंड को देखकर सुनीता मेरे ऊपर चढ़ गई और उसने लंड के ऊपर तीव्र गति से उछलना शुरू कर दिया।
मेरा लंड भी चरम आकार में आकर उसकी चुत की गहराई को नाप रहा था। उसके उछलते हुए स्तनों को देखकर लड और जोश में आ रहा था। कामयुद्ध अब अंतिम चरण में था. कोई भी योद्धा हार मानने को तैयार नहीं था।
उसकी चूत संकुचित होकर मेरे लंड को अंदर ही अंदर दबाने लगी।
पूरा बेडरूम आहों, कामुक सीत्कारों और शारीरिक घर्षण की मधुर आवाज़ों से गूँज रहा था। अचानक सुनीता ने उछलने की गति बढ़ा दी.
अब मेरे लिए संयम मुश्किल हो गया। सच में … इस मैथुन में सूनीता ने मुझे हरा दिया था. अब वो हिंसक होकर अपने कुल्लो से मेरी जांघों पर प्रहार कर रही थी।
एक वो क्षण आया … जब दोनों का गर्म लावा एक साथ निकला। सुनीता निढाल होकर मेरे ऊपर लेट गयी.
मैंने उसके होंठों को चूम लिया और कहा- तुमने आज मुझे तृप्ति दी है, जो मुझे आज मिला है उसकी तो मैंने कल्पना भी नहीं की थी.
अब हम पूर्णरूप से संतुष्ट हो चुके थे मगर साथ ही थक भी चुके थे। मैंने कपड़े पहनने शुरू किए. वो अभी भी नग्नावस्था में लेटी हुई थी. उसका चुत थोड़ा सा खुल सा गया था।
उसने जाने से पहले उसी नगे बदन में मेरे लिए चाय बनाई.
उसके कुल्ले का उठाव आज कुछ ज्यादा लग रहा था. शायद मेरे लंड ने उसके कुल्लो को थोड़ा चौड़ा कर दिया था। मैंने चाय बनने के समय में उसके कुल्लो को चूमा और सहलाया.
अगर समय का अभाव न होता तो लंड फिर से कुल्लो पर प्रहार के लिए खड़ा हो गया था।
चाय पीकर उसने मुझसे फिर आने का वादा लिया और उसके खुललोख
खमम
पर एक चपत लगा कर मैं घर से निकल दिया।
भाभी की चूत की कहानी पर अपनी राय भेजते रहें
मजे से लंड खड़ा करके भाभी की चुदाई की कहानी का मजा लेना है.
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आपका (ग्रूप सेक्स स्टोरीज )
group Sex Stories का
लेखक खेमचनद टाॅक ✍✍





















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